"अनंतवक्ता" ही क्यों?
15+राज्य और 10+ देशों तक बेबाक बात...
देश व दुनिया में रह रहे, लोगों के लिए देश की राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, स्वास्थ्य, सरोकार, कानून, आध्यात्म्य, और विज्ञान तकनीकी, के समाचार विचारों व नए विमर्ष द्वारा जन चेतना का सशक्त माध्यम है। टीआरपी के इस गलाकाट दौर में जब मीडिया संस्थानों द्वारा अपनी ही खबरों का खंडन करना पड़ता हो, और कई बार माफी मांगने की नौबत आ जाती हो, ऐसे में हम अपने विभिन्न प्रकल्पों, अभियानों द्वारा बेबाक विमर्ष के साथ सरोकार परक कंटेंट आप तक प्रस्तुत करते है, आपके सराहना भरे सन्देश इसकी पुश्टि करते हैं। समाज में हो रहे तेजी से बदलाव में हम और हमारे राष्ट्र निर्माण में योगदान धूमिल न हो जाए, इसके लिए समूह निदेशक- बबिता उपाध्याय और संपादक- पंकज उपाध्याय के सामूहिक प्रयासों से साल 2016 में “अनंतवक्ता” राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका वजूद में आई। जिसका पहला अंक बनाया गया। “कैसा हो नया साल! अन्नदाता का सवाल“ इस अंक के साथ साल 2016 में सुरु हुए इस यात्रा में व्यक्ति, संस्थाएं, और नामी-गिरामी लोग जुड़ते चले गए, और अब किसी भी बात को सामान्य जन मानस तह पहुंचाने का, एक सशक्त समृद्ध साधन है! कुछ पत्रिकाए जिसका समाज ने लोहा माना है...